Tuesday, 17 September 2024

बिल्ली और शालिक पक्षी की मजेदार कहानी (Funny story of the Cat and Shalik bird's)

बिल्ली और शालिक पक्षी की मजेदार कहानी 


एक सुहानी सुबह, एक हमिंग बर्ड एक विशाल बरगद के पेड़ की शाखा पर बैठा था। उसके शरीर पर सुंदर पंख सूरज की रोशनी में चमक रहे थे। नर बहुत खुश था, दिन भर वह एक शाखा से दूसरी शाखा पर उड़ता रहा, फल और जड़ें खाता रहा और तरह-तरह के गाने गुनगुनाता रहा। उसके पंखों और आवाज की मधुर धुन से पूरा जंगल जीवंत हो उठता था।

लेकिन शालिक की ख़ुशी पर एक जंगली बिल्ली का साया पड़ गया। यह बिल्ली बुद्धिमान और चालाक थी, हमेशा पक्षियों को पकड़ने की कोशिश करती थी। उसने सोचा, "अगर मैं आज इस मेंढक को पकड़ सका, तो यह मेरे लिए अच्छा भोजन होगा!"


बिल्ली छिपकर शालिक वृक्ष के नीचे खड़ी हो गई। ज़मीन के नीचे लताओं के पीछे छिपकर उसने शालिक को घूरकर देखा। उसकी आँखें शिकार पकड़ने की चाहत से चमक रही थीं।


शालिक भी काफी चतुर था. वह जानता था कि बिल्ली चालाक थी और शायद उसे फँसाने की कोशिश कर रही थी। तो वह दूर से ही बिल्ली का नजारा समझ गया। फिर शालिक ने मधुर स्वर में गाना शुरू किया, मानो उसे कुछ समझ में ही नहीं आया हो।


बिल्ली ने सोचा, “शालिक को कुछ समझ नहीं आया होगा। अब उसे पकड़ने का समय आ गया है!” वह धीरे-धीरे पेड़ की ओर आने लगा।


तभी शालिक पंख फड़फड़ाता हुआ उड़ गया और पेड़ के ऊपर एक शाखा पर बैठ गया। बिल्ली हैरान रह गई. वह खड़ा हुआ और सोचा, “यह कोई आसान शिकार नहीं है। मुझे और अधिक होशियार होने की जरूरत है।''


तब बिल्ली ने बड़े प्यार से शालिक से कहा, “हे शालिक! आप बहुत सुंदर गाते हैं, मैं आपकी धुन से मंत्रमुग्ध हो गया हूं। मैं आपका संगीत सुनने के लिए करीब आना चाहता था। क्या तुम नीचे आओगे और दूसरा गाना बजाओगे?”


महिला खुश हो गई और बोली, "तुम्हें सचमुच मेरा संगीत पसंद है?" मुझे नहीं पता था! अच्छा, मैं नीचे आ रहा हूँ।”


शालिक थोड़ा नीचे आकर दूसरी डाल पर बैठ गया और फिर गाने लगा। बिल्ली ने सोचा, "अब मैं उसे पकड़ सकती हूँ!" वह करीब आ गया.

लेकिन शालिक अचानक चुप हो गया। उन्होंने कहा, “ठीक है, बिल्ली भाई, तुम मुझसे इतनी देर से गाने के लिए कह रहे हो, लेकिन तुम मेरे लिए कुछ भी नहीं लाये। मुझे बहुत भूख लगी है!"


बिल्ली थोड़ी चिंतित हुई, लेकिन फिर मधुरता से मुस्कुराई और बोली, “ओह, तुम सही हो। आप मेरे मेहमान हैं, और मैं आपके लिए कुछ लाऊंगा। बिल्ली ने सोचा, "ठीक है, अगर मैं थोड़ा धैर्य रखूँ तो मैं लोमड़ी को अवश्य फँसा पाऊँगी।"


बिल्ली तुरंत पड़ोस के बगीचे से एक छोटा सा फल ले आई और उसे शालिक पर फेंक दिया। महिला हँसी और बोली, “यह बहुत हो गया! लेकिन मुझे कुछ बड़ा चाहिए. यह छोटा सा फल मेरी भूख नहीं मिटाएगा।”


बिल्ली थोड़ी नाराज थी. उसने सोचा, “कैसी मुसीबत है! लेकिन जब तक शालिक पकड़ा नहीं जाता तब तक मुझे चलते रहना होगा।” वह फिर बगल के बगीचे से एक बड़ा फल ले आया।


शालिकाति को इस बार और अधिक मजा आया. उसने कहा, “ओह बिल्ली भाई, तुम तो बहुत उदार हो! लेकिन क्या आप मेरे लिए एक गाना बजा सकते हैं? मैं आपकी मधुर आवाज़ सुनना चाहता हूँ।”


इस बार बिल्ली सचमुच निराश हुई। वह गाएगा! यह उसके लिए संभव नहीं है. लेकिन उसने समझदारी दिखाते हुए शालिक से कहा, "अच्छा सुनो, मैं गाना नहीं गा सकता, लेकिन अगर मैं तुम्हारे लिए कुछ और खाना लाऊं तो क्या तुम दूसरा गाना गाओगे?"


फिर शालिक ने अजीब सी मुस्कान के साथ कहा, “वाह! तुम बहुत चतुर हो! लेकिन बिल्ली भाई, अगर तुम मेरे मज़ेदार गाने सुनना चाहते हो तो तुम्हें धैर्य रखना होगा। पहले तुम कुछ खाना ले आओ, फिर मैं तुम्हारे लिए गाना गाऊंगा।”

फिर बिल्ली दौड़ी और पड़ोसी बगीचे से और फल ले आई। लेकिन शालिक को पहले ही एहसास हो गया था कि बिल्ली उसे फंसाने की कोशिश कर रही है। अत: उसने अपने पंख फैलाये और आकाश की ओर उड़ गया। बिल्ली स्तब्ध खड़ी रह गयी.


इस प्रकार बिल्ली की चालाकी शालिक की बुद्धि के आगे झुक गई। कॉकटील उड़ गया और जंगल में दूसरे पेड़ पर बैठ गया और मधुर गायन करने लगा और बिल्ली निराशा में सोचने लगी, "मैं इस छोटे से पक्षी से कैसे हार गई!"


जैसा कि हम कहानी के अंत में सीखते हैं, चतुराई हमेशा काम नहीं करती। कभी-कभी समझदारी और धैर्य आपको खतरे से बचा सकता है।


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Sunday, 15 September 2024

Funny story of the Cat and Bird

 Funny story of the Cat and Bird


One fine morning, a hummingbird was sitting on the branch of a huge banyan tree. The beautiful feathers on his body were shining in the sunlight. The male was very happy, all day long he was flying from branch to branch, eating fruits and roots, and humming various songs. The whole forest would come alive with the sweet melody of his wings and voice.


But Shalik's happiness was overshadowed by a forest cat. This cat was intelligent and cunning, always trying to catch birds. He thought, “If I can catch this frog today, it will be a good meal for me!”

The cat hid and stood under the Shalik tree. Hiding himself behind the vines under the ground, he stared at Shalik. His eyes were shining with the desire to catch prey.


Shalik was also quite clever. He knew that the cat was cunning and was probably trying to trap him. So he understood the vision of the cat from a distance. Then the Shalik began to sing in a sweet voice, as if he did not understand anything.

The cat thought, “The shalik must not have understood anything. Now is the time to catch him!” He slowly started coming towards the tree.


Just then, the shalik flew up with a flap of its wings and sat on a branch above the tree. The cat was shocked. He stood and thought, “This is not an easy prey. I need to get smarter.”

The cat said very sweetly to Shalik, “Oh Shalik! You sing so beautifully, I am fascinated by your melody. I wanted to come closer to hear your music. Will you come down and play another song?”


The lady was amused and said, "You really like my music?" I did not know! Well, I'm coming down.”

The shalik came down a little and sat on another branch and started singing again. The cat thought, “Now I can catch him!” He came closer.


But the Shalik suddenly became silent. He said, “Well, cat brother, you've been asking me to sing for so long, but you haven't brought me anything. I'm so hungry!”


The cat was a little worried, but then smiled sweetly and said, “Oh, you're right. You are my guest, and I will bring you something.” The cat thought, "Well, if I have a little patience I will surely be able to trap the fox."

The cat quickly fetched a small fruit from the neighboring garden and threw it at Shalik. The woman laughed and said, "This is enough! But I want something bigger. This little fruit will not satisfy my hunger.”


The cat was a little annoyed. He thought, “What a trouble! But I must continue until the Shalik is caught.” He again brought a big fruit from the garden next door.


Shalikati got more fun this time. He said, “Oh cat brother, you are very generous! But can you sing me a song? I want to hear your sweet voice.”

The cat was really disappointed this time. He will sing! It is not possible for him. But he wisely said to Shalik, "Well listen, I can't sing, but if I bring you some more food, will you sing another song?"


Shalik then said with a funny smile, "Wow! You are very clever! But cat brother, you'll have to be patient if you want to listen to my funny songs. First you bring some food, then I will sing for you.”


The cat then ran and fetched more fruit from the neighboring garden. But Shalik had already realized that the cat was trying to trap him. So he spread his wings and flew towards the sky. The cat stood stunned.

Thus, the cat's cunning succumbed to Shalik's intelligence. The cockatiel flew away and sat on another tree in the forest singing sweetly, and the cat began to think in despair, "How I have been defeated by this little bird!"


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Friday, 13 September 2024

একটি সাহসী ব্যাঙের গল্প (A brave frog story)

 


একটি সাহসী ব্যাঙের গল্প 

একদিনের কথা, ছোট্ট একটি গ্রামে বাস করত একটি বাচ্চা ব্যাঙ। তার নাম ছিল টুকু। টুকু ছিল খুবই দুরন্ত এবং সাহসী। তার স্বভাব ছিল নতুন নতুন জিনিসের সন্ধান করা এবং প্রতিটি দিনকে নতুন করে দেখা। তার মা তাকে সবসময় সাবধান করতেন, কিন্তু টুকু কখনো কারো কথা শুনতো না।


একদিন টুকু ঠিক করলো, সে তার ছোট্ট পুকুর থেকে বেরিয়ে জঙ্গলের ভিতর যাবে এবং নতুন কিছু দেখবে। মা বারবার নিষেধ করলেও, টুকুর মনে হয়েছিল, "আমি এতটুকু বড় হয়ে গেছি, আমি এখন সব করতে পারি!" তাই এক সকালে মায়ের চোখ ফাঁকি দিয়ে, সে জঙ্গলের দিকে রওনা দিলো।

জঙ্গলে ঢুকে প্রথমেই সে দেখলো অসংখ্য বড় বড় গাছ, ঝোপঝাড় এবং বিভিন্ন ধরনের পশুপাখি। টুকু খুবই মুগ্ধ হলো। সে এমন কিছু আগে কখনও দেখেনি।


কিছুক্ষণ জঙ্গলে ঘুরে বেড়ানোর পর টুকু দেখলো সামনে একটি বড় নদী। নদীর পাড়ে বসে সে চারপাশ দেখতে লাগলো। তখনই এক বড়সড় বাঘ তাকে দেখে ফেললো। বাঘটি ধীরে ধীরে টুকুর দিকে এগিয়ে আসতে লাগলো। টুকু ভীষণ ভয় পেয়ে গেল, কিন্তু সে জানত না কী করবে।


টুকু মনে করলো, "এখন কী হবে! আমি মায়ের কথা শুনিনি, এখন আমি ফেঁসে গেছি।"


ঠিক সেই মুহূর্তে জঙ্গলের আরেকটি বুদ্ধিমান প্রাণী, কাকু নামের একটি কাক, তাকে দেখতে পেলো। কাকু তখনই টুকুকে বললো, "ভয় পাস না, আমি তোকে সাহায্য করবো।" কাকু তখন বাঘের দৃষ্টি অন্য দিকে সরানোর জন্য মাটিতে পড়ে থাকা একটি পাথর ঠোকা দিয়ে ঠোকা দিয়ে মারতে লাগলো। বাঘটি হঠাৎ কাকুকে দেখে ক্ষেপে গেলো এবং টুকুকে ভুলে গিয়ে কাকের দিকে দৌড়ালো।


কাকু তখন চতুরতার সাথে আকাশে উড়ে গেলো। বাঘটি হতাশ হয়ে ফিরে গেলো। টুকু তখন নিজেকে আবার নিরাপদ মনে করলো। সে কাকুকে ধন্যবাদ দিলো এবং প্রতিজ্ঞা করলো যে, সে আর কখনো মায়ের কথা অমান্য করবে না।


টুকু দ্রুত পুকুরের দিকে ফিরে আসলো এবং মায়ের কাছে ক্ষমা চাইল। মা তাকে বুকে টেনে নিয়ে বললেন, "তুমি যখন মায়ের কথা শুনবে, তখন কোনো বিপদ তোমাকে স্পর্শ করতে পারবে না।"


এই ঘটনার পর থেকে টুকু আর কখনো মায়ের নিষেধ না শুনে কোনো বিপদজনক জায়গায় যায়নি এবং নিজের সাহসিকতার সাথে নতুন কিছু জানার চেষ্টা চালিয়ে যেতে থাকলো। কিন্তু সে এবার থেকে সব সময় সাবধানতা অবলম্বন করতে শিখে গেলো।


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Thursday, 12 September 2024

বিড়াল আর শালিকের মজার গল্প (Funny story of the Cat and Shalik)


 বিড়াল আর শালিকের মজার গল্প

এক চমৎকার সকালে, এক বিশাল বটগাছের ডালে বসে ছিল একটি শালিক পাখি। তার গায়ের সুন্দর পালকগুলো রোদের আলোতে ঝলমল করছিল। শালিকটি ছিল বেশ সুখী, সারাদিন সে গাছের ডালে ডালে উড়ে বেড়ায়, ফল-মূল খায়, আর বিভিন্ন গানের সুর তোলে। তার ডানা আর গলার মিষ্টি সুরে পুরো বনভূমি যেন সজীব হয়ে উঠত।


কিন্তু শালিকের আনন্দে ছায়া ফেলল বনের এক বিড়াল। এ বিড়ালটি ছিল বুদ্ধিমান এবং ধূর্ত, সবসময় পাখি ধরার ফন্দি আঁটত। সে ভাবল, “আজ যদি এই শালিকটাকে ধরতে পারি, তবে আমার জন্য ভালো মজার খাবার হবে!”


বিড়ালটি লুকিয়ে লুকিয়ে শালিকের গাছের নিচে এসে দাঁড়াল। মাটির নিচে লতাগুল্মের আড়ালে নিজেকে লুকিয়ে রেখে সে শালিকের দিকে তাকিয়ে রইল। তার চোখ দুটো শিকার ধরার লোভে চকচক করছিল।


শালিকও বেশ চালাক ছিল। সে জানত যে বিড়ালটি ধূর্ত এবং সে বোধহয় তাকে ফাঁদে ফেলতে চাইছে। তাই সে দূর থেকে বিড়ালের দৃষ্টি বুঝতে পারল। তখন শালিকটি মিষ্টি গলায় গাইতে শুরু করল, যেন কিছুই বুঝতে পারেনি।


বিড়াল ভাবল, “শালিকটা নিশ্চয়ই কিছুই বুঝতে পারেনি। এখন সময় এসে গেছে তাকে ধরার!” সে আস্তে আস্তে গাছের দিকে এগিয়ে আসতে লাগল।


ঠিক তখনই শালিকটি ডানার ঝাপট দিয়ে উড়ে উঠল আর গাছের উপরের এক ডালে গিয়ে বসলো। বিড়াল হতবাক হয়ে গেল। সে দাঁড়িয়ে দাঁড়িয়ে ভাবতে লাগল, “এ তো সহজ শিকার নয়। আমাকে আরও বুদ্ধি খাটাতে হবে।”


বিড়ালটি তখন খুব মিষ্টি করে শালিককে বলল, “ওহে শালিক! তুমি যে এত সুন্দর গান গাও, তোমার সুরে আমি মুগ্ধ। তোমার গান শুনতে আমি আরও কাছে আসতে চেয়েছিলাম। তুমি কি একটু নিচে এসে আরেকটা গান শোনাবে?”


শালিকটি মজা পেয়ে বলল, “তুমি সত্যি আমার গান পছন্দ কর? আমি তো জানতাম না! আচ্ছা, আমি নিচে আসছি।”


শালিকটি একটু নিচে এসে আরেকটি ডালে বসলো এবং আবার গাইতে লাগল। বিড়ালটি ভাবল, “এবার তাকে ধরতে পারব!” সে আরও কাছে এল।


কিন্তু শালিকটি হঠাৎ করে চুপ করে গেল। সে বলল, “আচ্ছা বিড়াল ভাই, তুমি এতক্ষণ ধরে আমাকে গান শোনাতে বলছ, কিন্তু তুমি তো আমার জন্য কিছুই নিয়ে আসনি। আমার তো অনেক খিদে লেগেছে!”


বিড়ালটি একটু চিন্তায় পড়ল, তবে সঙ্গে সঙ্গে মিষ্টি হেসে বলল, “ওহ, ঠিক বলেছ। তুমি আমার মেহমান, আর আমি তোমার জন্য কিছু নিয়ে আসব।” বিড়ালটি ভাবল, “আচ্ছা, একটু ধৈর্য ধরলে নিশ্চয়ই শালিকটাকে ফাঁদে ফেলতে পারব।”


বিড়ালটি দ্রুত পাশের বাগান থেকে একটি ছোট ফল নিয়ে এসে শালিকের দিকে ছুড়ে দিল। শালিকটি হেসে বলল, “এই তো বেশ! কিন্তু আমি আরও বড় কিছু চাই। এই ছোট্ট ফল আমার খিদে মেটাবে না।”


বিড়ালটি এবার একটু বিরক্ত হল। সে ভাবল, “কী ঝামেলায় পড়লাম! কিন্তু শালিকটা ধরা না দেওয়া পর্যন্ত আমাকে চালিয়ে যেতে হবে।” সে আবার পাশের বাগান থেকে একটা বড় ফল নিয়ে এসে দিল।


শালিকটি এবার আরও মজা পেল। সে বলল, “ওহ বিড়াল ভাই, তুমি তো খুবই উদার! কিন্তু তুমি কি আমাকে একটা গান শোনাতে পারবে? আমি তোমার মিষ্টি সুর শুনতে চাই।”


বিড়াল এবার সত্যিই হতাশ হয়ে গেল। সে গান গাইবে! এটা তো তার পক্ষে সম্ভব নয়। কিন্তু বুদ্ধি খাটিয়ে সে শালিককে বলল, “আচ্ছা শোন, আমি গানের সুর করতে পারি না, কিন্তু আমি যদি তোমার জন্য আরও কিছু খাবার নিয়ে আসি, তাহলে কি তুমি আরেকটা গান শোনাবে?”


শালিকটি তখন মজার হাসি দিয়ে বলল, “বাহ! তুমি তো খুব চতুর! কিন্তু বিড়াল ভাই, আমার মজার গান শুনতে হলে তোমাকে ধৈর্য ধরতে হবে। প্রথমে তুমি কিছু খাবার নিয়ে আসো, তারপর আমি তোমার জন্য গান গাইব।”


বিড়ালটি তখন দৌড়ে গিয়ে পাশের বাগান থেকে আরও ফল নিয়ে এল। কিন্তু শালিক ইতিমধ্যে বুঝে গিয়েছিল যে বিড়াল তাকে ফাঁদে ফেলতে চাইছে। তাই সে এবার নিজের পাখা মেলে দিল আর আকাশের দিকে উড়ে গেল। বিড়ালটি হতভম্ব হয়ে দাঁড়িয়ে রইল।


এইভাবে, বিড়ালের চালাকি শালিকের বুদ্ধির কাছে হার মানল। শালিক উড়ে গিয়ে বনের অন্য গাছের ওপর বসে মিষ্টি গলায় গান গাইতে লাগল আর বিড়ালটি হতাশ হয়ে ভাবতে লাগল, “কীভাবে আমি এই ছোট্ট পাখির কাছে পরাজিত হলাম!”


গল্পের শেষে আমরা শিখলাম, চতুরতা সবসময় কাজ দেয় না। কখনও কখনও বুদ্ধি আর ধৈর্য দিয়েই বিপদ থেকে মুক্তি পাওয়া যায়।


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খরগোশের ও কাঁঠবিড়ালি গল্প (The story of the Rabbit and the Jackal)

 


শিরোনাম: খরগোশের দুঃসাহসিক অভিযান



প্রথম অধ্যায়: খরগোশের নতুন বন্ধু

একদিন, ছোট্ট খরগোশ টুটু বনে ঘুরতে ঘুরতে একটা অদ্ভুত আওয়াজ শুনতে পেল। সে এগিয়ে গিয়ে দেখতে পেল একটা ছোট্ট কাঠবিড়ালি গাছের নিচে বসে কাঁদছে। টুটু বলল, “তুমি কেন কাঁদছ?” কাঠবিড়ালি বলল, “আমার বাড়ির পথ ভুলে গেছি।” টুটু হাসি দিয়ে বলল, “আমি তোমাকে সাহায্য করব। চল, একসাথে খুঁজে বের করি।”


 

দ্বিতীয় অধ্যায়: গহীন বনের রহস্য

টুটু আর তার নতুন বন্ধু বনের ভেতরে হাঁটতে হাঁটতে দেখল, এক জায়গায় অনেক বড়ো গাছের গুঁড়ি পড়ে আছে। গুঁড়ির ওপাশ থেকে এক বুড়ো কাক ডেকে বলল, “তোমরা কি বনের রহস্য জানো?” টুটু বলল, “না, আমরা জানি না। কী সেই রহস্য?” বুড়ো কাক বলল, “এই বনের মধ্যে এক গুপ্তধন লুকিয়ে আছে, কিন্তু সেটা পেতে হলে সাহস আর বন্ধুত্বের পরীক্ষা দিতে হবে।”

তৃতীয় অধ্যায়: গুপ্তধনের সন্ধান

টুটু আর তার বন্ধু বুড়ো কাকের কথা শুনে গুপ্তধনের সন্ধানে বের হল। তারা গভীর জঙ্গলে ঢুকে পড়ল, যেখানে বড় বড় গাছ আর অদ্ভুত শব্দে ভয় পাওয়ার মতো পরিবেশ। হঠাৎ করে তারা একটা নদীর ধারে এসে পৌঁছল। কিন্তু নদী পার হওয়ার কোনো উপায় নেই। কাঠবিড়ালি বলল, “আমার দাদি বলেছিল, সত্যিকারের বন্ধুরা সব বাধা কাটিয়ে উঠতে পারে। আমরা পারব!”

চতুর্থ অধ্যায়: বন্ধুত্বের শক্তি

টুটু আর কাঠবিড়ালি একসাথে নদী পার হওয়ার উপায় খুঁজতে লাগল। হঠাৎ টুটুর মাথায় একটা বুদ্ধি এল। সে বলল, “আমরা যদি নদীর পাড়ে পড়ে থাকা পাথরগুলো একে একে জায়গায় রাখি, তাহলে হয়তো আমরা হেঁটে নদী পার হতে পারব।” তারা দু’জনে মিলে পাথর জড়ো করতে শুরু করল, আর কিছুক্ষণের মধ্যে তারা নদী পার হয়ে গেল।

পঞ্চম অধ্যায়: গুপ্তধনের রহস্য উদ্ঘাটন

নদী পার হওয়ার পর তারা গুপ্তধনের কাছে পৌঁছল। কিন্তু তারা যা ভাবছিল, সেটা একটা সাধারণ ধন নয়। বনের মাঝখানে তারা দেখতে পেল, বন্যপ্রাণীদের জন্য একটা বড়ো ফলের বাগান। বুড়ো কাক এসে বলল, “এই হলো আসল গুপ্তধন—বন্ধুত্ব আর সাহায্যের মাধ্যমে একসাথে সুখে থাকা।” টুটু আর কাঠবিড়ালি বুঝল, আসল ধন তো বন্ধুত্বের শক্তি।

শেষ অধ্যায়: খুশির পথে ফিরে যাওয়া

গুপ্তধনের সত্যিকারের মানে বুঝে, টুটু আর কাঠবিড়ালি খুশি মনে বাড়ি ফিরে গেল। তারা জঙ্গলে যত বন্ধু পেল, সবাইকে নিয়ে তারা আনন্দে বাগানের ফল খেতে শুরু করল। সেই দিন থেকে টুটু আর কাঠবিড়ালির বন্ধুত্ব আরও গভীর হল, আর তারা একসাথে অনেক দুঃসাহসিক অভিযান করতে লাগল।


এই গল্পটি ছোটদের জন্য বন্ধুত্ব, সহানুভূতি আর সাহসের শিক্ষার মাধ্যমে এক আনন্দময় অভিজ্ঞতা তৈরি করবে।


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Friday, 6 September 2024

Funny story of Ganesha and the mouse

 

Funny story of Ganesha and the mouse


Ganesha, a popular Hindu deity, is beloved for his elephant-like head and huge belly. But the story of the mouse who lives with him cannot stop laughing. In today's story we will learn how this little mouse became the vehicle of Ganesha and the story is full of fun!

One day, all the gods gathered together in heaven for a special task. Lord Indra called the meeting, and all the gods appeared. Ganesha was also there, but he was not very hungry. Even then he ate a little, because he was in a bad mood if he didn't eat anything during the meeting. At the end of the meeting, when all the deities were going back to their work, Ganesha was also looking for his vehicle. Yes, Ganesha then used a big peacock as a vehicle.


But suddenly a small rat appeared in front of Ganesha. As small as this little creature looks, so is its temperament. The rat came in front of Ganesha and said, “Sir Ganesha, I want to be your new vehicle. Will you accept me as a vehicle?”

Ganesh was a little surprised at first. So small mice and huge Ganesha! Is it possible? Ganesh said with a smile, “You are very young. Can you really carry me?”


But the rat was very stubborn. He looked at Ganesha and said, “You give me a chance to try. I can take you.” A storm of laughter flowed through Ganesha's mind. "Well, let's see what this little mouse can do," he thought.

Ganesha sat on the rat, and found, strangely, that the rat was able to carry him perfectly. Ganesh was surprised. This little mouse is so strong! The rat moved with him as if he was made for Ganesha.



From then on, Ganesha took the rat as his vehicle. However, one day a funny thing happened. Ganesha and his rat were going to a village. On the way Ganesha felt very hungry. Ganesha went to a house in the village and asked for something to eat. The people of the house seated Ganesha and did great service, arranged a great feast. Ganesha started eating and as he ate, his stomach started to swell.

On the other hand, the mouse sat outside and waited. Suddenly he heard a strange sound. Looking back, a huge snake is coming to attack him! The rat got very scared and started running. He was running so fast that even Ganesha lost his balance and fell down. Ganesh started to gurgle while reading with so much food in his stomach.


At that time the gods were watching everything and their laughter did not stop. Ganesha himself realized that this funny match of his heavy body with the rat race would make anyone laugh. Ganesha also started laughing. Later he pacified the rat and took it again as his vehicle.

From then on Ganesha and his rat's friendship deepened. Ganesha knew that the rat, however small, had infinite strength and courage. And the rat also knew that Ganesha would always protect him.


Although the ending of the story is funny, we can learn from this story that one should not look down on one's appearance or abilities. Just as the little mouse was able to carry Ganesha, so many small things in life can do big things.


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গণেশ আর ইঁদুরের মজার গল্প (Funny story of Ganesha and the mouse)

 



গণেশ আর ইঁদুরের মজার গল্প

গণেশ, হিন্দুদের এক জনপ্রিয় দেবতা, তাঁর হাতির মতো মাথা আর বিশাল পেটের জন্য সবার প্রিয়। কিন্তু তাঁর সাথে যে ইঁদুরটি থাকে, তার গল্প জানলে হাসি থামাতে পারবেন না। আজকের গল্পে আমরা জানব কেমন করে এই ছোট্ট ইঁদুরটি গণেশের বাহন হয়ে উঠল আর সেই গল্পে লুকিয়ে আছে দারুণ মজা!


একদিন, স্বর্গে সব দেবতারা একসাথে মিলিত হলেন একটি বিশেষ কাজে। দেবরাজ ইন্দ্র মিটিং ডাকলেন, আর সব দেবতারা হাজির হলেন। সেখানে গণেশও ছিলেন, কিন্তু তাঁর পেটে তেমন খিদে ছিল না। তারপরেও তিনি একটু কিছু খেয়ে নিলেন, কারণ মিটিং-এর সময় মুখে কিছু না দিলে তাঁর মনমেজাজ খারাপ হয়ে যায়। মিটিং শেষে, দেবতারা সবাই যখন নিজেদের কাজে ফিরে যাচ্ছিলেন, তখন গণেশও তাঁর বাহনটিকে খুঁজছিলেন। হ্যাঁ, গণেশ তখন একটি বড়-সড় ময়ূরকে বাহন হিসেবে ব্যবহার করতেন।


কিন্তু হঠাৎ করে গণেশের সামনে হাজির হল এক ছোট্ট ইঁদুর। ছোট্ট এই প্রাণীটি দেখতে যেমন ছোট, তেমনই তার মেজাজও ছোট। ইঁদুরটি গণেশের সামনে এসে বলল, “গণেশ মশাই, আমি আপনার নতুন বাহন হতে চাই। আপনি কি আমাকে বাহন হিসেবে গ্রহণ করবেন?”

গণেশ প্রথমে একটু অবাক হলেন। এতো ছোট্ট ইঁদুর আর বিশাল গণেশ! এটা কি সম্ভব? গণেশ হাসতে হাসতে বললেন, “তুমি তো খুব ছোট। তুমি কি সত্যি আমাকে বহন করতে পারবে?”


ইঁদুরটি কিন্তু খুবই জেদি ছিল। সে গণেশের দিকে তাকিয়ে বলল, “আপনি আমাকে একটু চেষ্টা করার সুযোগ দিন। আমি আপনাকে নিয়ে যেতে পারব।” গণেশের মনের মধ্যে হাসির ঝড় বয়ে গেল। তিনি ভাবলেন, “আচ্ছা, দেখি তো, এ ছোট্ট ইঁদুরটি কী করতে পারে।”

গণেশ ইঁদুরের ওপর বসলেন, আর দেখলেন, অদ্ভুতভাবে, ইঁদুরটি তাঁকে দারুণভাবে বহন করতে পারছে। গণেশ বিস্মিত হলেন। এই ছোট্ট ইঁদুরটি এতটা শক্তিশালী! ইঁদুরটি তাঁকে নিয়ে এমনভাবে চলতে লাগল, যেন সে গণেশের জন্যই তৈরি হয়েছিল।


এরপর থেকে গণেশ ইঁদুরকেই তাঁর বাহন হিসেবে গ্রহণ করলেন। তবে, একদিন এক মজার ঘটনা ঘটল। গণেশ এবং তাঁর ইঁদুরটি তখন এক গ্রামে যাচ্ছিলেন। পথে গণেশের পেটে খুব খিদে লাগল। গ্রামের এক বাড়িতে গণেশ গিয়ে খাওয়ার জন্য কিছু চাইলেন। বাড়ির লোকজন গণেশকে বসিয়ে খুব সেবা করলেন, দারুণ ভোজনের আয়োজন করলেন। গণেশ খাওয়া শুরু করলেন আর খেতে খেতে তাঁর পেট ক্রমশ ফুলতে লাগল।


অন্যদিকে, ইঁদুরটি বাইরে বসে বসে অপেক্ষা করছিল। হঠাৎ সে এক অদ্ভুত শব্দ শুনল। পেছনে ফিরে তাকিয়ে দেখে, একটা বিশাল সাপ তাকে আক্রমণ করতে আসছে! ইঁদুরটি ভীষণ ভয় পেয়ে দৌড়াতে শুরু করল। সে এত জোরে দৌড়াচ্ছিল যে গণেশও ভারসাম্য হারিয়ে পড়ে গেলেন। পেটের এত খাবার নিয়ে পড়তে গিয়ে গণেশ গড়াগড়ি খেতে লাগলেন।

সেই সময় দেবতারা সবকিছু দেখছিলেন আর তাঁদের হাসি আর থামছিল না। গণেশ নিজেও বুঝতে পারলেন, ইঁদুরের দৌড়ের সঙ্গে তাঁর ভারী শরীরের এই মজার মিল দেখলে যে কারও হাসি পাবে। গণেশও হাসতে লাগলেন। পরে ইঁদুরটিকে শান্ত করে আবার তাঁর বাহন হিসেবে নিয়ে নিলেন।


এরপর থেকে গণেশ এবং তাঁর ইঁদুরের বন্ধুত্ব আরও গভীর হয়ে গেল। গণেশ জানতেন, ইঁদুরটি যতই ছোট হোক, তার মধ্যে অসীম শক্তি আর সাহস আছে। আর ইঁদুরটিও জানত, গণেশ তাকে সবসময় রক্ষা করবে।

গল্পের শেষটা মজার হলেও এই গল্প থেকে আমরা শিখতে পারি, কারও বাহ্যিক আকার বা ক্ষমতা দেখে তাকে ছোট করে দেখা উচিত নয়। ছোট্ট ইঁদুর যেমন গণেশকে বহন করতে সক্ষম হয়েছিল, তেমনই জীবনে অনেক ছোট জিনিসও বড় কিছু করতে পারে।

গণেশ আর ইঁদুরের এই হাস্যকর কিন্তু শিক্ষণীয় গল্প শিশুদের যেমন আনন্দ দেয়, তেমনই বড়রাও এর মধ্যে খুঁজে পান দারুণ এক জীবনের শিক্ষা।



Thursday, 5 September 2024

गणेश जी और चूहे की मजेदार कहानी (Funny story of Ganesha and the mouse)

 


गणेश जी और चूहे की मजेदार कहानी


गणेश, एक लोकप्रिय हिंदू देवता, अपने हाथी जैसे सिर और विशाल पेट के लिए प्रिय हैं। लेकिन उसके साथ रहने वाले चूहे की कहानी सुनकर हंसी नहीं रुकती. आज की कहानी में हम जानेंगे कि कैसे यह छोटा सा चूहा गणेशजी का वाहन बना और यह कहानी मजेदार है!

एक दिन, सभी देवता एक विशेष कार्य के लिए स्वर्ग में एकत्रित हुए। भगवान इंद्र ने सभा बुलाई और सभी देवता उपस्थित हुए। गणेश भी वहीं थे, लेकिन उन्हें ज्यादा भूख नहीं थी. फिर भी उन्होंने थोड़ा खाया, क्योंकि मीटिंग के दौरान कुछ न खाने पर उनका मूड ख़राब हो जाता था. सभा के अंत में जब सभी देवता अपने काम पर वापस जा रहे थे तो गणेश भी अपने वाहन की तलाश में थे। हाँ, तब गणेशजी ने वाहन के रूप में एक बड़े मोर का उपयोग किया था।

लेकिन अचानक गणेश जी के सामने एक छोटा सा चूहा आ गया। यह छोटा सा जीव दिखने में जितना छोटा है उतना ही इसका स्वभाव भी है। चूहा गणेश जी के सामने आया और बोला, “गणेश जी, मैं आपका नया वाहन बनना चाहता हूँ। क्या आप मुझे वाहन के रूप में स्वीकार करेंगे?”


गणेश को पहले तो थोड़ा आश्चर्य हुआ. इतने छोटे चूहे और विशाल गणेश! क्या ऐसा संभव है? गणेश ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम बहुत छोटे हो. क्या तुम सचमुच मुझे ले जा सकते हो?”

लेकिन चूहा बहुत जिद्दी था. उन्होंने गणेश की ओर देखा और कहा, “आप मुझे कोशिश करने का मौका दीजिए। मैं तुम्हें ले जा सकता हूँ।” गणेशजी के मन में हँसी का तूफ़ान बह उठा। "ठीक है, देखते हैं यह छोटा चूहा क्या कर सकता है," उसने सोचा।


गणेश चूहे पर बैठे और आश्चर्यजनक रूप से पाया कि चूहा उन्हें पूरी तरह से ले जाने में सक्षम था। गणेश को आश्चर्य हुआ. यह छोटा चूहा कितना ताकतवर है! चूहा उसके साथ ऐसे चला जैसे वह गणेश जी के लिए ही बना हो।


तभी से गणेश जी ने चूहे को अपना वाहन बना लिया। हालाँकि, एक दिन एक अजीब बात घटी। गणेश और उनका चूहा एक गाँव जा रहे थे। रास्ते में गणेश जी को बहुत भूख लगी। गणेश गाँव के एक घर में गया और खाने के लिए कुछ माँगा। घर के लोगों ने गणेशजी को बैठाकर खूब सेवा की, खूब दावत की। गणेश ने खाना शुरू किया और खाते-खाते उनका पेट फूलने लगा।

उधर चूहा बाहर बैठ कर इंतजार करने लगा. अचानक उसे एक अजीब आवाज सुनाई दी। पीछे मुड़कर देखा तो एक बहुत बड़ा सांप उस पर हमला करने आ रहा है! चूहा बहुत डर गया और भागने लगा। वह इतनी तेजी से भाग रहा था कि गणेश भी अपना संतुलन खो बैठे और गिर पड़े। पेट में इतना सारा खाना होते हुए गणेश पढ़ते-पढ़ते बड़बड़ाने लगे।


उस समय देवता सब कुछ देख रहे थे और उनकी हँसी नहीं रुक रही थी। गणेश को स्वयं एहसास हुआ कि चूहों की दौड़ के साथ उनके भारी शरीर का यह मज़ेदार मेल किसी को भी हँसा देगा। गणेश जी भी हंसने लगे. बाद में उन्होंने चूहे को शांत किया और उसे फिर से अपना वाहन बना लिया।

तभी से गणेश और उनके चूहे की दोस्ती गहरी हो गई। गणेश जी जानते थे कि चूहा चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, उसमें असीम शक्ति और साहस है। और चूहे को यह भी पता था कि गणेश जी हमेशा उसकी रक्षा करेंगे।


हालाँकि कहानी का अंत मज़ेदार है, लेकिन इस कहानी से हम यह सीख सकते हैं कि किसी को अपनी शक्ल या काबिलियत को तुच्छ नहीं समझना चाहिए। जिस तरह छोटा चूहा गणेश को ले जाने में सक्षम था, उसी तरह जीवन में कई छोटी चीजें बड़े काम कर सकती हैं।


गणेश और चूहे की यह विनोदी लेकिन शिक्षाप्रद कहानी बच्चों को उतनी ही आनंदित करती है जितनी वयस्कों को इसमें जीवन के महान सबक मिलते हैं।


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Wednesday, 4 September 2024

(Indian 2 Film (2024): A thrilling revenge movie) ইন্ডিয়ান ২ (২০২৪): একটি চমকপ্রদ প্রতিশোধের মুভি



Indian 2 (2024): একটি চমকপ্রদ প্রতিশোধের মুভি 


মুভিতে  সিদ্ধার্থ সেন (কমল হাসান) একটি অবসরপ্রাপ্ত সেনা অফিসার, যিনি তার নিজের বিচার ব্যবস্থার মাধ্যমে দুর্নীতির বিরুদ্ধে লড়াই চালিয়ে যাচ্ছেন। 'ইন্ডিয়ান ২' সিনেমাটি হল 'ইন্ডিয়ান' (১৯৯৬) এর সিক্যুয়েল। প্রথম সিনেমায়, আমরা সিদ্ধার্থ সেনকে দেখি একজন দেশপ্রেমিক হিসেবে, যিনি দুর্নীতির শিকার এবং অবিচারের বিরুদ্ধে লড়াই করতে নিজের বিচার ব্যবস্থার আশ্রয় নেন। কিন্তু এই সিক্যুয়েলে, আমরা দেখতে পাই যে তার লড়াই এখনও শেষ হয়নি।


মুভির শুরু: সিনেমার শুরুতেই আমরা দেখতে পাই যে সিদ্ধার্থ সেন একটি গ্রামে বসবাস করছেন, কিন্তু তার মন শান্ত নেই। তার মেয়ে, অদিতি (রাখুল প্রীত সিং), একজন সৎ সরকারি অফিসার, যিনি দুর্নীতির বিরুদ্ধে লড়াইয়ে তার বাবার মতোই কঠোর। কিন্তু দুর্নীতিগ্রস্ত এক চক্রের হাতে তার নির্মম হত্যা হয়। সিদ্ধার্থ সেন তার মেয়ের মৃত্যুর খবর পেয়ে তার প্রতিশোধের যাত্রা শুরু করেন।


প্রতিশোধের যাত্রা: সিদ্ধার্থ সেন তার পুরনো সত্ত্বায় ফিরে যান, একজন প্রতিশোধপ্রবণ যোদ্ধা হিসেবে। তিনি খুঁজে বের করেন যে তার মেয়ের হত্যার পিছনে রয়েছে একটি বিশাল দুর্নীতিগ্রস্ত মাফিয়া চক্র, যারা দেশের উচ্চপদস্থ নেতাদের সাথে মিলে তার মেয়েকে হত্যা করেছে। সিদ্ধার্থ ধীরে ধীরে তার পরিকল্পনা তৈরি করেন এবং একে একে এই মাফিয়ার শীর্ষ নেতাদের হত্যা করতে শুরু করেন।


প্রথমে, তিনি ধরা পড়া এড়াতে নিজের কৌশল পরিবর্তন করেন। তিনি কৌশলে তাদের দুর্নীতির প্রমাণ সংগ্রহ করেন এবং তারপর তাদের বিরুদ্ধে কাজ করেন। প্রতিটি হত্যাকাণ্ডে তিনি একটি সংকেত রেখে যান যা তাকে 'ইন্ডিয়ান' বলে চিহ্নিত করে। তার লক্ষ্য শুধু প্রতিশোধ নেওয়া নয়, দেশের দুর্নীতিগ্রস্ত ব্যবস্থাকে ভেঙে দেওয়া।



কাহিনীর মোড়: যখন সিদ্ধার্থ সেনের অভিযান তার চূড়ান্ত পর্যায়ে পৌঁছায়, তখন তিনি আবিষ্কার করেন যে তার মেয়ের হত্যা শুধু একটি ব্যক্তিগত প্রতিশোধের ব্যাপার নয়, বরং একটি বিশাল ষড়যন্ত্রের অংশ, যা দেশের নিরাপত্তাকে হুমকির মুখে ফেলেছে। এই ষড়যন্ত্রের প্রধান পেছনে আছে দেশেরই কিছু শক্তিশালী ব্যক্তি, যারা রাজনৈতিক এবং অর্থনৈতিক ক্ষমতার অপব্যবহার করছে।


এমন সময়ে, সিদ্ধার্থ সেনকে সহযোগিতা করতে আসে একটি গুপ্তচর সংস্থা, যারা দেশের এই ষড়যন্ত্র রুখতে চায়। তারা সিদ্ধার্থকে জানায় যে তার মেয়ের হত্যার পিছনে ছিল একটি নতুন জাতীয় নিরাপত্তা বিল, যা পাস হলে দেশের নিরাপত্তা ব্যবস্থা দুর্বল হয়ে পড়বে এবং দুর্নীতির সুযোগ আরও বাড়বে।



চূড়ান্ত যুদ্ধ: সিদ্ধার্থ সেন তার মেয়ের হত্যাকারীদের চিহ্নিত করে তাদের ধ্বংস করার পরিকল্পনা করে। চূড়ান্ত লড়াইয়ে তিনি তার বুদ্ধিমত্তা এবং সামরিক কৌশল ব্যবহার করে সমস্ত দুর্নীতিগ্রস্ত নেতাদের একসঙ্গে ধ্বংস করেন। শেষ লড়াইয়ে, তিনি নিজের জীবন বিপন্ন করেও দেশের সুরক্ষার জন্য লড়াই করেন।


তার সংগ্রামের পর, দেশজুড়ে তার নামে একটি নতুন আন্দোলনের সূচনা হয়, যেখানে সাধারণ মানুষ দুর্নীতির বিরুদ্ধে লড়াইয়ে একত্রিত হয়। সিনেমার শেষ দৃশ্যে, সিদ্ধার্থ সেনকে তার মেয়ের কবরের সামনে দেখা যায়, যেখানে তিনি শপথ করেন যে যতদিন বেঁচে থাকবেন, ততদিন দুর্নীতির বিরুদ্ধে তার লড়াই অব্যাহত থাকবে।


উপসংহার: 'ইন্ডিয়ান ২' হল একটি চমকপ্রদ প্রতিশোধের গল্প, যা শুধুমাত্র একজন ব্যক্তির নয়, বরং পুরো দেশের লড়াইয়ের প্রতীক। সিদ্ধার্থ সেনের চরিত্র আমাদের দেখায় যে কিভাবে একজন মানুষ তার প্রিয়জনের জন্য এবং দেশের মঙ্গলের জন্য নিজের জীবন উৎসর্গ করতে পারে। সিনেমাটি আমাদের শেখায় যে সত্য এবং ন্যায়ের জন্য লড়াই সবসময়ই মূল্যবান, এবং কোনও কিছুই এই লড়াইকে থামাতে পারে না।





এই সিনেমার মাধ্যমে পরিচালক আবারও তুলে ধরেছেন দুর্নীতি এবং তার বিরুদ্ধে লড়াইয়ের গুরুত্বপূর্ণ বার্তা। 'ইন্ডিয়ান ২' শুধু একটি সিনেমা নয়, বরং একটি আদর্শের প্রতীক, যা মানুষকে অনুপ্রাণিত করে নিজেদের অধিকার এবং ন্যায়ের জন্য লড়াই করতে।






Sunday, 1 September 2024

বর্ষার রাতে একা হাঁটা স্মৃতি

 


বর্ষার রাতে একা হাঁটা


প্রথম অংশ: অন্ধকার শুরু

স্কুল ছুটি হয়েছে, কিন্তু আজকের দিনটা ছিল অন্যরকম। আকাশ মেঘে ঢেকে গেছে, বাতাসে একটা অদ্ভুত শীতলতা। অণিকা ক্লাস থেকে বেরিয়ে বাইরে আসতেই টের পেল, ঝড় আসছে। বাড়ি ফিরতে হবে, কিন্তু মেইন রোডটা অনেক লম্বা। শর্টকাট ধরে গেলেই তাড়াতাড়ি পৌঁছানো যাবে। সিদ্ধান্ত নিয়ে অণিকা পা বাড়ায় সেই সরু রাস্তাটার দিকে যেটা একটা ছোটো বনের ভেতর দিয়ে গেছে।

বৃষ্টি পড়তে শুরু করল। প্রথমে সামান্য, তারপর ধীরে ধীরে ভারি হতে লাগল। অণিকা হাতের ছাতাটা খুলল, কিন্তু বাতাস এত জোরে বইছিল যে ছাতাটা ধরে রাখা মুশকিল হয়ে পড়ল। রাস্তা ফাঁকা, কেউ নেই। সবারই হয়তো আগে থেকেই বোঝা উচিত ছিল, এমন এক ঝড় আসছে যে এক মুহূর্তও দেরি করলে বড় বিপদ হতে পারে।


দ্বিতীয় অংশ: অদ্ভুত পদশব্দ

রাস্তার অন্ধকার আরও গভীর হয়ে উঠছে। বৃষ্টির শব্দে সব কিছু ঢেকে গেছে, কিন্তু হঠাৎই অণিকা টের পায়, তার পিছনে কিছু একটা চলছে। সে থামল, কিন্তু পায়ের শব্দটা তখনও শোনা যাচ্ছে। ভয় তাকে গ্রাস করতে শুরু করল। বনের ভিতর দিয়ে আসার সময়ই সে শুনেছিল, এই রাস্তায় অনেক অদ্ভুত ঘটনা ঘটে। কিন্তু এগুলো সবই ছিল গল্প, এমনটাই সে ভেবেছিল।

সে আবার হাঁটা শুরু করল, কিন্তু এবার আরও দ্রুত। পিছনের পদশব্দও দ্রুত হতে লাগল। অণিকার মনের ভেতর ভয় জমতে লাগল। বৃষ্টির সাথে সেই অদ্ভুত শব্দ যেন আরও রহস্যময় হয়ে উঠছিল। সে রাস্তা থেকে একটু সরে গিয়ে বড় একটা গাছের পেছনে লুকিয়ে পড়ল।


তৃতীয় অংশ: মুখোমুখি

পদশব্দ থেমে গেল। অণিকা ভয় পেয়ে মাথা বের করে দেখল। একটা ছায়ামূর্তি তার কাছেই দাঁড়িয়ে আছে। অণিকার মনে হল, এটা যেন তার চেনা কেউ। কিন্তু এই অন্ধকারে ঠিক চিনতে পারা যাচ্ছে না। মূর্তিটা ধীরে ধীরে তার দিকে এগিয়ে এল। অণিকা পিছনে সরে যেতে যেতে একটা পাথরের উপর হোঁচট খেয়ে পড়ে গেল।

ছায়ামূর্তিটা সামনে এসে দাঁড়াল। অণিকা হাত-পা ঠাণ্ডা হয়ে গেল। কে এই ব্যক্তি? এই সময়ে এখানে কি করছে? হঠাৎ, এক ঝলক বিদ্যুৎ চমকানোর সাথে সাথে অণিকা দেখতে পেল, লোকটার মুখে একটা অদ্ভুত হাসি। যেন সে অনেক কিছু জানে, যা অণিকা জানে না।

লোকটা সামনে এসে বলল, “তোমারই জন্য অপেক্ষা করছিলাম।”


চতুর্থ অংশ: আতঙ্কের মুহূর্ত

অণিকা বুঝতে পারছিল না কি করবে। ছায়ামূর্তিটা তার দিকে এগিয়ে আসতেই তার হৃৎপিণ্ড দ্রুত চলতে লাগল। “তুমি কে?” অণিকা কাঁপা কাঁপা গলায় জিজ্ঞেস করল।

“তুমি আমাকে চিনতে পারছ না, তাই না? আমি তোমার স্কুলের পুরনো চেনা বন্ধু।” লোকটা বলল, আর তার চোখে এক ধরণের ক্রূরতা দেখা গেল।

অণিকা তাকে চিনতে পারল না, কিন্তু তার মনে হচ্ছিল যে সে কোনো ভুল করছে। লোকটা এগিয়ে এসে অণিকার হাতটা ধরে টান দিল। অণিকা নিজেকে ছাড়ানোর চেষ্টা করল, কিন্তু লোকটার শক্তি অনেক বেশি ছিল।


পঞ্চম অংশ: ছুটে পালানো

এক মুহূর্তের মধ্যে, অণিকা বুঝল যে তাকে পালাতে হবে। সে লোকটার হাতে কামড় দিয়ে দৌড়ে পালাতে শুরু করল। লোকটা একটা চিৎকার দিল, কিন্তু অণিকা পিছনে না তাকিয়ে দৌড়াতে লাগল। বৃষ্টিতে পথ আরও পিচ্ছিল হয়ে উঠেছে, কিন্তু অণিকা থামল না। সে জানে, থামলে তাকে আর বাঁচানো যাবে না।


ষষ্ঠ অংশ: একটি পুরোনো বাড়ি

দৌড়াতে দৌড়াতে অণিকা বনের একদম গভীরে এসে পড়ল। এখানে একটা পুরোনো, ভাঙাচোরা বাড়ি ছিল, যা অনেক দিন ধরে পরিত্যক্ত ছিল। অণিকা কোনও উপায় না দেখে বাড়িটার মধ্যে ঢুকে পড়ল। ভেতরে ঢুকেই সে দরজাটা বন্ধ করে দিল, কিন্তু তার মনে হল লোকটা তার পিছনে আসছে।

বাড়িটার ভেতর অন্ধকার, মেঝে থেকে ছাদের পর্যন্ত সব জায়গায় ধুলো জমে গেছে। কোথাও কোনো শব্দ নেই, কিন্তু বাইরে থেকে লোকটার পায়ের শব্দ শোনা যাচ্ছে। অণিকা নিজের নিঃশ্বাস ধরে রেখে অপেক্ষা করতে লাগল। তার মনে হচ্ছিল, যেন তার হৃদস্পন্দন পুরো বাড়িটা শোনা যাচ্ছে।


সপ্তম অংশ: এক অজানা রহস্য

হঠাৎ, অণিকার চোখে একটা পুরোনো বাক্স পড়ল, যা একটা কোণে পড়ে ছিল। বৃষ্টি আর বজ্রপাতের মধ্যে, সেই বাক্সটা যেন আলাদা করে চমকাচ্ছিল। অণিকা কৌতূহল নিয়ে বাক্সটার দিকে এগিয়ে গেল। সে ধীরে ধীরে বাক্সটা খুলল, আর তার ভেতর যা দেখল, তা দেখে সে হতভম্ব হয়ে গেল।

বাক্সটার ভেতরে ছিল পুরোনো কাগজ, কিছু পাথরের টুকরো, আর একটা ছুরি। কাগজগুলোতে অনেক পুরোনো একটা ভাষায় কিছু লেখা ছিল, যা অণিকা বুঝতে পারল না। কিন্তু ছুরিটা দেখেই তার মনে ভয় ঢুকে গেল। এতদিনের পুরোনো গল্পগুলো তার মনে ফিরে আসতে লাগল। এই ছুরির সাথে নিশ্চয়ই কোনো গা ছমছমে ইতিহাস জড়িত ছিল।


অষ্টম অংশ: ধাওয়া এবং মুক্তি

ঠিক তখনই, দরজায় একটা ধাক্কার শব্দ হল। লোকটা হয়তো বুঝতে পেরেছে যে অণিকা এই বাড়িতেই লুকিয়ে আছে। অণিকা দ্রুত ছুরিটা হাতে নিয়ে দরজার পাশে দাঁড়িয়ে গেল। দরজাটা খোলার সাথে সাথে সে ছুরিটা লোকটার দিকে ছুঁড়ে মারল।

লোকটা চমকে উঠল, আর সেই সুযোগে অণিকা জানালার বাইরে লাফিয়ে বেরিয়ে এল। বাইরে তখনও বৃষ্টি পড়ছে, কিন্তু অণিকা এবার নিজেকে বাঁচানোর জন্য ছুটতে লাগল। পিছনে তাকানোর সাহস করল না, আর একটানা দৌড়াতে দৌড়াতে সে অবশেষে মেইন রোডে এসে পৌঁছাল।


নবম অংশ: সত্যের উদঘাটন

মেইন রোডে আসতেই অণিকা দেখতে পেল একটা পুলিশ ভ্যান দাঁড়িয়ে আছে। সে দৌড়ে গিয়ে পুলিশদের সব কিছু বলল। পুলিশরা অণিকাকে নিয়ে বনের দিকে ফিরে গেল। সেখানে গিয়ে তারা দেখতে পেল, সেই ছায়ামূর্তি লোকটা রক্তাক্ত অবস্থায় পড়ে আছে। তার হাতে সেই ছুরির দাগ, যা অণিকা ছুঁড়ে মেরেছিল।

পুলিশরা তাকে ধরে নিয়ে গেল, আর অণিকা বাড়ি ফিরে এলো। বাড়িতে সবাই তার জন্য খুব চিন্তিত ছিল, কিন্তু যখন তারা শুনল কি ঘটেছে, তারা সবাই আতঙ্কিত হয়ে গেল।


দশম অংশ: আতঙ্কের শেষে

কিছুদিন পর পুলিশরা তদন্ত করে জানতে পারল, লোকটা একজন অপরাধী, যে অনেক দিন ধরেই বনের মধ্যে লুকিয়ে ছিল। সে বহুদিন ধরে এই এলাকার মানুষকে ভয় দেখিয়ে আসছিল। কিন্তু অণিকার সাহসিকতা তাকে পরাজিত করেছে।

অণিকা ধীরে ধীরে সেই ভয়ঙ্কর রাতের স্মৃতি ভুলে যেতে শুরু করল। কিন্তু তার মনে সবসময়ই একটা প্রশ্ন থেকে গেল—সেই বাক্সটা কি ছিল? আর সেই কাগজগুলোতে কি লেখা ছিল?

শেষমেশ, যদিও রহস্যটা পুরোপুরি সমাধান হয়নি, অণিকা জানে যে সে এক ভয়ঙ্কর অভিজ্ঞতার মধ্যে দিয়ে গেছে। আর হয়তো সেই বাক্সটা এখনো তার ভবিষ্যতে কোনো দিন ফিরে আসতে পারে।

সমাপ্তি:

এই গল্পটা আপনাকে একটা রহস্যময় ও ভীতিকর অভিজ্ঞতার মধ্যে নিয়ে গেল। এটি অণিকার সাহসিকতা ও বুদ্ধিমত্তার গল্প, যা তাকে বিপদ থেকে রক্ষা করেছিল। গল্পের শেষে কিছু প্রশ্ন অমীমাংসিত থেকে যায়, যা গল্পটাকে আরও আকর্ষণীয় করে তোলে।



"সমুদ্রের মাঝখানে এক জাহাজ প্রচন্ড ঝড়ের মধ্যে পড়ে যাওয়ার ভয়ঙ্কর গল্প " (A terrifying story of a ship caught in a violent storm in the middle of the ocean)

  শিরোনাম: “ঝড়ের রাতে ফিরে দেখা” সমুদ্রটা ছিল শান্ত, সূর্য তখন পশ্চিমে হেলে পড়েছে। “এম.ভি. পূরবী” নামে একটি মালবাহী জাহাজ ভারত থেকে সিঙ্গ...